अनमोल दोहे
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रैदास के अनमोल दोहे - 3
विष को प्याला राना जी मिलाय द्यो मेरथानी ने पाये।
कर चरणामित् पी गयी रे, गुण गोविन्द गाये॥1॥
रैदास
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